बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। अभिनेता मुकुल देव का 23 मई 2025 को दिल्ली में निधन हो गया। 54 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया, जिससे उनके प्रशंसकों और फिल्मी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। पिछले कुछ समय से वे एक संक्षिप्त बीमारी से जूझ रहे थे और दिल्ली के एक निजी अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान ही उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्होंने अंतिम सांस ली।
मुकुल देव का पारिवारिक और प्रारंभिक जीवन
मुकुल देव उन कलाकारों में से थे जिन्होंने हिंदी सिनेमा और टेलीविजन दोनों में अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनका जन्म 17 सितंबर 1970 को दिल्ली में हुआ था। उनके पिता हरि देव दिल्ली पुलिस में सहायक आयुक्त के पद पर कार्यरत थे और 2019 में उनका निधन हो गया। मुकुल देव के बड़े भाई राहुल देव भी फिल्मी दुनिया का जाना-पहचाना नाम हैं। राहुल ने तमिल, तेलुगु, मलयालम और हिंदी फिल्मों में खलनायक की भूमिका से खास पहचान बनाई है।

मुकुल देव का टीवी और फिल्मी करियर
मुकुल देव का अभिनय करियर 1996 में शुरू हुआ जब उन्होंने टेलीविजन शो ‘मुमकिन’ से छोटे पर्दे पर कदम रखा। इसके बाद वे ‘घरवाली ऊपरवाली’, ‘कहानी घर घर की’, ‘कभी कभी’, और ‘प्यार जिंदगी है’ जैसे धारावाहिकों में नजर आए। उन्होंने फियर फैक्टर इंडिया के पहले सीजन की मेजबानी भी की, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वे सिर्फ अभिनेता ही नहीं, एक शानदार होस्ट भी हैं।
बात करें फिल्मों की, तो मुकुल ने 1996 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘दस्तक’ से बड़े पर्दे पर कदम रखा। इस फिल्म में उन्होंने एसीपी रोहित मल्होत्रा का किरदार निभाया था। इसके बाद ‘वजूद’, ‘कोहराम’, ‘किला’, ‘दिल्लगी’, ‘सातियों का खेमा’, ‘यमला पगला दीवाना’, ‘सन ऑफ सरदार’, ‘आर… राजकुमार’, ‘जय हो’ जैसी फिल्मों में काम किया और हर बार एक अलग रंग में नजर आए। उन्होंने फिल्मों में मुख्य किरदार से लेकर सहायक भूमिकाओं तक, हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया।
क्षेत्रीय सिनेमा में मुकुल देव की भूमिका
हिंदी फिल्मों के अलावा मुकुल देव ने क्षेत्रीय सिनेमा में भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। खासकर तेलुगु फिल्म ‘कृष्णा’ में उनके खलनायक के किरदार को काफी सराहा गया। पंजाबी और मलयालम सिनेमा में भी उन्होंने अभिनय किया, जिससे यह साफ हो गया कि वे बहुभाषी कलाकार थे जो किसी भी भाषा या मंच पर अपने अभिनय से छाप छोड़ सकते थे।
उनकी प्रतिभा को लेकर इंडस्ट्री में हमेशा सम्मान रहा। 2011 में उन्हें फिल्म ‘यमला पगला दीवाना’ में उनके प्रदर्शन के लिए अमरीश पुरी पुरस्कार से नवाजा गया। यह सम्मान उनके अभिनय कौशल की सच्ची पहचान था।
मुकुल देव का निजी जीवन और परिवार
जहां तक उनके निजी जीवन की बात है, मुकुल देव ने शिल्पा देव से शादी की थी। हालांकि बाद में दोनों अलग हो गए थे। उनकी एक बेटी भी है, जिसका नाम सिया है। मुकुल निजी जीवन को बहुत ज्यादा मीडिया में नहीं लाते थे, लेकिन उनके परिवार के करीबियों का कहना है कि वे एक बेहद जिम्मेदार पिता थे।
फिल्मी दुनिया में मुकुल देव को मिली श्रद्धांजलि
मुकुल देव के असामयिक निधन की खबर आते ही फिल्मी दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई। कई सितारों ने सोशल मीडिया पर उन्हें श्रद्धांजलि दी। अभिनेता मनोज बाजपेयी ने उन्हें एक “आध्यात्मिक भाई” बताते हुए कहा कि वे एक बेहद समझदार और संवेदनशील कलाकार थे। विंदू दारा सिंह ने ट्वीट कर बताया कि मुकुल उनके लिए सिर्फ एक दोस्त नहीं, बल्कि भाई की तरह थे। दीपशिखा नागपाल ने भी उनके साथ बिताए पलों को याद करते हुए कहा कि मुकुल हमेशा मुस्कुराते रहते थे और सभी को सकारात्मक ऊर्जा देते थे।
मुकुल देव की विरासत और यादें
मुकुल देव का अचानक यूं चले जाना न सिर्फ उनके परिवार और दोस्तों के लिए, बल्कि उनके लाखों प्रशंसकों के लिए भी एक गहरा आघात है। वे उन चुनिंदा अभिनेताओं में से थे जो अपनी अभिनय क्षमता के साथ-साथ अपने सौम्य व्यवहार के लिए भी जाने जाते थे। उनके निभाए किरदार आज भी लोगों को याद हैं, चाहे वह खलनायक की भूमिका हो या कोई संवेदनशील पुलिस अफसर की।
आज जब उनके जाने की खबर हर तरफ फैली है, तो लोग सिर्फ एक अभिनेता को नहीं, बल्कि एक संजीदा कलाकार और सच्चे इंसान को याद कर रहे हैं। उनके जीवन और करियर ने ये साबित किया कि लगन और मेहनत से कोई भी कलाकार खुद को स्थापित कर सकता है, भले ही शुरुआत छोटे पर्दे से क्यों न हो।
मुकुल देव भले ही अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनके निभाए किरदार और उनकी विनम्रता हमेशा भारतीय सिनेमा के इतिहास में दर्ज रहेंगी। फिल्म जगत को एक सच्चे कलाकार की कमी हमेशा खलेगी।








